हाईकोर्ट ने जबलपुर में खराब ट्रैफिक सिग्नलों पर मांगा जवाब

"ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था से जनता बेहाल, कोर्ट ने मांगा जवाब"

जबलपुर, 10 जुलाई 2025: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर में महीनों से बंद पड़े ट्रैफिक सिग्नलों और सीसीटीवी कैमरों को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नगर निगम, स्मार्ट सिटी प्रबंधन, ट्रैफिक पुलिस समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

 

छह महीने से ठप हैं ट्रैफिक सिग्नल

जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता पी. जी. नजपांडे द्वारा दायर की गई थी, जिसमें बताया गया कि शहर के 26 ट्रैफिक सिग्नल बीते छह महीने से बंद पड़े हैं। इसके अलावा, सभी प्रमुख चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे, जिससे ई-चालान प्रणाली भी ठप हो चुकी है।

 

 जनता हो रही है परेशान

रिपोर्टों के अनुसार, ब्लूम चौक, रद्दी चौकी और घमापुर जैसे प्रमुख चौराहों पर जबरदस्त जाम लग रहा है। लोगों को एक-एक चौराहा पार करने में 35 से 40 मिनट तक लग रहे हैं। न सिग्नल काम कर रहे हैं और न ही ट्रैफिक कंट्रोल में है, जिससे आए दिन एक्सीडेंट और झगड़े की स्थिति बन रही है।

 

 ठेका खत्म, कोई नया इंतज़ाम नहीं

मामले की जांच में सामने आया कि ट्रैफिक सिग्नल और कैमरों का संचालन करने वाली एजेंसी का ठेका खत्म हो चुका है, और अभी तक नया टेंडर नहीं दिया गया है। तीनों जिम्मेदार संस्थाएं — नगर निगम, स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस — एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, लेकिन समाधान की कोई दिशा नहीं दिख रही।  

 

 कोर्ट का हस्तक्षेप

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। नोटिस निम्न अधिकारियों को भेजे गए हैं:

  • परिवहन आयुक्त
  • कलेक्टर, जबलपुर
  • नगर निगम आयुक्त
  • पुलिस अधीक्षक
  • स्मार्ट सिटी परियोजना प्रभारी
  • ट्रैफिक डीएसपी

 जनता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यह लापरवाही आम नागरिकों के अनुच्छेद 19 और 21 (आवागमन की स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है। इसलिए, कोर्ट से अनुरोध किया गया कि वह मंडेटरी आदेश (mandamus) जारी कर सभी ट्रैफिक सिग्नलों और सीसीटीवी सिस्टम को शीघ्र चालू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे।

 

 अगली सुनवाई 27 जुलाई को

कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 27 जुलाई 2025 तय की है। यदि तब तक संतोषजनक जवाब या कार्ययोजना नहीं दी गई, तो कोर्ट सख्त आदेश जारी कर सकता है — जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई या फंड आवंटन का सीधा निर्देश शामिल हो सकता है।

 

 निष्कर्ष

जबलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रशासन की लापरवाही, ठेका नवीनीकरण में देरी और आपसी तालमेल की कमी ने शहरवासियों को परेशान कर दिया है। अब हाईकोर्ट की सख्ती ही उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आई है।

 

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