MP News: लोकतंत्र सेनानी परिवारों को मिलेगा सम्मान, रोजगार और सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता – सीएम मोहन यादव का ऐलान
भोपाल।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को सम्मान देने की दिशा में एक अहम घोषणा की है। अब इन परिवारों को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार, साथ ही सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। यह ऐलान उन्होंने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित “लोकतंत्र सेनानी प्रादेशिक सम्मेलन” में किया।
स्वास्थ्य सुविधा में भी मिलेगी राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के स्वतंत्रता सेनानियों को आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी जाएगी। साथ ही, पीएम एंबुलेंस सेवा के माध्यम से भी उन्हें चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सम्मान समारोह के प्रमुख बिंदु:
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और हरियाणा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को ताम्रपत्र देकर किया गया सम्मानित।
थावरचंद गहलोत ने कहा – “देश का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा है, आपातकाल के समय में 46 से अधिक अध्यादेश जारी कर संविधान को शिथिल किया गया।”
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश उन गिने-चुने राज्यों में शामिल है जो लोकतंत्र सेनानियों को सबसे अधिक सुविधाएं दे रहा है।
सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर हमला:
सीएम ने समारोह के दौरान कांग्रेस और गांधी परिवार को निशाने पर लेते हुए कहा:
“गांधी परिवार की खुद को देश से ऊपर मानने की मानसिकता रही है। इंदिरा गांधी ने दोबारा सत्ता में आकर 90 से अधिक राज्य सरकारों को भंग कर दिया था। यह लोकतंत्र के खिलाफ सीधा हमला था।”
उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के “ऑपरेशन सिंदूर” पर दिए बयान की भी आलोचना की, और कहा कि यह बयान सेना और देश दोनों का अपमान है।
संविधान और अतीत की याद:
मुख्यमंत्री ने कहा:
“संविधान के हत्यारे आज उसे बचाने की बात कर रहे हैं। जिन्होंने डॉ. अंबेडकर के साथ अन्याय किया, वे आज अंबेडकर की बातें कर रहे हैं। ये अस्वीकार्य है।”
समारोह में शामिल हुए प्रमुख चेहरे:
इस गरिमामय समारोह में प्रदेशभर से लगभग 700 मीसाबंदी और उनके परिजन उपस्थित थे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वी. डी. शर्मा, हरियाणा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, तुलसी सिलावट, विधायक रामेश्वर शर्मा, अजय बिश्नोई, और भगवान दास सबनानी सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
निष्कर्ष:
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में उठाया गया यह कदम न केवल उनके योगदान को मान्यता देने वाला है, बल्कि भावी पीढ़ियों को आपातकाल जैसे दौर की स्मृति से जोड़ने का भी माध्यम बनेगा।