नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र भाषण के दौरान सैकड़ों प्रतिनिधियों का बहिष्कार, वैश्विक आलोचना की लहर

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने संबोधन के दौरान गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराया और कहा कि “इजरायल को अपना काम पूरा करना होगा”। उनके इस बयान के बाद, सैकड़ों प्रतिनिधियों ने विरोध स्वरूप महासभा कक्ष से बहिष्कार किया। यह कदम गाजा में बढ़ते मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती आलोचना के बीच उठाया गया है। नेतन्याहू ने अपने संबोधन में हमास की तुलना आतंकवाद से की और पश्चिमी देशों द्वारा फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा।

विस्तृत विवरण:

नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा कि इजरायल “सात मोर्चों पर युद्ध” लड़ रहा है, जिसमें हमास, हिज़्बुल्लाह, हूथी विद्रोही, और ईरान समर्थित मिलिशिया शामिल हैं। उन्होंने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा का अधिकार बताया और कहा कि इजरायल नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। उनके इस बयान के बाद, सैकड़ों प्रतिनिधियों ने विरोध स्वरूप महासभा कक्ष से बहिष्कार किया। यह कदम गाजा में बढ़ते मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती आलोचना के बीच उठाया गया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने गाजा में बढ़ते मानवीय संकट पर चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से संघर्ष विराम की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने नेतन्याहू के खिलाफ युद्ध अपराधों के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है, जिसके कारण उनकी यात्रा मार्ग में बदलाव आया है। नेतन्याहू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें राजनीति से प्रेरित बताया है।

निष्कर्ष:

नेतन्याहू का संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिया गया भाषण और उसके बाद हुए प्रतिनिधियों के बहिष्कार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इजरायल की नीतियों के प्रति बढ़ती असहमति को उजागर किया है। गाजा में जारी संघर्ष और मानवीय संकट के समाधान के लिए वैश्विक दबाव बढ़ता जा रहा है।

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