भारत का व्यापार दल जल्द अमेरिका रवाना होगा: व्यापार मंत्रालय के अधिकारी
"दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करने पर होगा ज़ोर"
नई दिल्ली, 10 जुलाई 2025:
भारत सरकार के एक वरिष्ठ व्यापार मंत्रालय अधिकारी ने पुष्टि की है कि एक भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल (Indian trade delegation) जल्द ही संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का दौरा करेगा ताकि द्विपक्षीय व्यापार समझौते (bilateral trade deal) पर और विस्तृत वार्ता की जा सके
पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य
- यह दौरा, भारत-यूएस व्यापार समझौते में शेष बाधाओं—विशेषकर ऑटो कंपोनेंट्स, स्टील और कृषि उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ (शुल्क)—को दूर करने के लिए आयोजित किया जा रहा है ।
- भारत अभी भी कृषि और डेयरी क्षेत्रों को खोलने से इंकार कर रहा है, जबकि अमेरिका उचित टैरिफ छूट की मांग कर रहा है, जिसमें भारत चाहता है कि उसे वियतनाम और चीन की अपेक्षा प्राथमिकता (preferential tariff treatment) दी जाए
भारत ने WTO में उत्तराधिकार शुल्क (retaliatory duties) लगाने का प्रस्ताव रखा है क्योंकि अमेरिकी 25% टैरिफ भारत के लगभग $2.89 अरब के एक्सपोर्ट्स पर प्रभाव डाल सकता है
यात्रा का समय और गंतव्य
- एक अधिकारी ने बताया कि यात्रा की तारीखें अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुई हैं, लेकिन उम्मीद है कि अगले सप्ताह यूएस की ओर रुख किया जाएगा ।
- इससे पहले भारत के मुख्य वार्ताकार, राजेश अग्रवाल (वाणिज्य वाणिज्यिक सचिव), जून 26 से जुलाई 2 तक वाशिंगटन में वार्ता कर चुके हैं ।
आगामी लक्ष्य और व्यापार आकांक्षाएँ
- दोनों देशों ने सितंबर–अक्टूबर 2025 तक समझौते की पहली खंड (first tranche) को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है, जिससे दोनों देशों का वार्षिक व्यापार $500 अरब तक पहुंच सकेगा ।
- भारत और अमेरिका आंशिक/इंटरिम समझौते के जरिये, जल्द लाभ (early mutual wins) हासिल करने के लिए तैयार हैं, ताकि सीमा समाप्ति से पहले कुछ प्रमुख चुनौतियों का समाधान हो सके ।
निष्कर्ष
इस दौरान भारत की प्राथमिकता स्पष्ट है—राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहे। जबकि अमेरिका कुछ क्षेत्र खुलने की मांग कर रहा है, भारत सीमाओं को सावधानीपूर्वक रखता है और किसी भी व्यापार समझौते को उसी स्थिति में स्वीकार करेगा जब वह स्थायी, संतुलित और दोनों देशों के लिए लाभदायक हो।