Bone Bank: जबलपुर में खुलेगा MP का पहला सरकारी बोन बैंक; इन मरीजों को होगा फायदा, एक्सपर्ट ने ये कहा
मध्य प्रदेश को मिलेगा पहला सरकारी बोन बैंक: गरीब और गंभीर मरीजों के लिए नई उम्मीद
मध्य प्रदेश में पहली बार एक सरकारी बोन बैंक की स्थापना की जा रही है, जो न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि हजारों जरूरतमंद और गंभीर मरीजों के लिए जीवनदान का जरिया भी बनेगा। इस बोन बैंक की मदद से अब उन मरीजों को राहत मिल सकेगी, जिन्हें हड्डियों की गंभीर समस्या के चलते ऑपरेशन की जरूरत होती है।
शुरुआत में यह बोन बैंक मेडिकल अस्पताल में संचालित होगा, जहां आवश्यक सर्जरी की जाएगी और फिर ऑपरेशन के दौरान निकाली गई हड्डियों को सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जाएगा। ये संरक्षित हड्डियां भविष्य में उन मरीजों के इलाज में काम आएंगी, जिन्हें बोन ग्राफ्टिंग या अन्य जटिल सर्जरी की आवश्यकता होगी।
यह पहल विशेष रूप से उन गरीब और कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी, जो महंगे निजी अस्पतालों में इस तरह की सुविधा नहीं ले सकते थे। अब सरकारी अस्पताल में ही उन्हें वह इलाज मिल सकेगा, जो अब तक केवल सीमित लोगों की पहुंच में था।
राज्य सरकार की यह योजना न केवल चिकित्सा सुविधा को बेहतर बनाएगी, बल्कि अंगदान और हड्डी दान को लेकर लोगों में जागरूकता भी बढ़ाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को एक नई ज़िंदगी मिलने की उम्मीद भी बढ़ेगी।
मध्य प्रदेश को मिलने जा रहा है पहला सरकारी बोन बैंक, जबलपुर बना केंद्र
मध्य प्रदेश में हड्डियों से जुड़ी चिकित्सा जरूरतों को देखते हुए अब राज्य को अपना पहला सरकारी बोन बैंक मिलने जा रहा है। यह बोन बैंक जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थापित किया जा रहा है। इसकी तैयारी करीब दो साल पहले शुरू की गई थी और अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
अब तक राज्य में बोन बैंक की सुविधा केवल कुछ चुनिंदा निजी अस्पतालों तक ही सीमित थी, जिससे आम लोगों, खासकर गरीब मरीजों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता था। लेकिन इस नई पहल से सरकारी स्तर पर भी हड्डियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
बोन बैंक का उद्देश्य उन मरीजों की मदद करना है, जिन्हें दुर्घटना, कैंसर, या किसी अन्य कारण से हड्डियों की आवश्यकता होती है। कई बार सर्जरी या गंभीर चोटों के चलते मरीज की अपनी हड्डियाँ इस्तेमाल के योग्य नहीं रह जातीं, ऐसे में बोन बैंक से सुरक्षित रखी गई हड्डियाँ जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं।
इस बैंक में एकत्र की गई हड्डियों को पूरी तरह स्टेराइल और सुरक्षित माहौल में रखा जाएगा, और उन्हें पांच साल तक संरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर ये हड्डियाँ उन मरीजों को दी जाएंगी, जिन्हें बोन ट्रांसप्लांट या बोन ग्राफ्टिंग की आवश्यकता होगी।
यह सरकारी बोन बैंक न सिर्फ प्रदेश के चिकित्सा ढांचे को मजबूती देगा, बल्कि गरीब और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए एक बड़ी राहत और उम्मीद भी साबित होगा। आने वाले समय में यह सुविधा पूरे राज्य के लिए एक मील का पत्थर बन सकती है।
कैसे मिलेगा बोन बैंक से फायदा? जानिए प्रक्रिया और मरीजों को होने वाले लाभ
मध्य प्रदेश में सरकारी बोन बैंक की स्थापना से अब मरीजों को हड्डी प्रत्यारोपण के दौरान जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता था, उन्हें काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। इस नई सुविधा से इलाज की प्रक्रिया न केवल आसान होगी, बल्कि समय और खर्च दोनों में भी बचत होगी।
बोन बैंक की प्रक्रिया बेहद वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से पूरी की जाएगी। सबसे पहले, ऑपरेशन या दान के जरिए प्राप्त हड्डियों को जांच के लिए दिल्ली की विशेष प्रयोगशाला में भेजा जाएगा, जहां उनका पूरा मेडिकल परीक्षण किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हड्डियाँ संक्रमणमुक्त और प्रत्यारोपण के योग्य हैं।
जांच पूरी होने के बाद, इन हड्डियों को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर विशेष डीप फ्रीजर में संरक्षित किया जाएगा। इस अत्याधुनिक तकनीक की मदद से हड्डियाँ पांच वर्षों तक सुरक्षित रखी जा सकती हैं, और जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है।
अब तक प्रदेश में सरकारी स्तर पर बोन बैंक की सुविधा न होने के कारण मरीजों को बाहर के राज्यों से हड्डियाँ मंगवानी पड़ती थीं। इससे इलाज में देरी होती थी और मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता था। लेकिन अब जब यह सुविधा प्रदेश में ही उपलब्ध होगी, तो न केवल इलाज की गति तेज़ होगी, बल्कि सैकड़ों जरूरतमंद मरीजों को समय पर हड्डी प्रत्यारोपण की सुविधा भी मिल सकेगी।
यह पहल मध्य प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है और आने वाले समय में यह राज्यभर के मरीजों के लिए राहत की सांस साबित होगी।
संदर्भ :-
By संजीव चौधरी & NDTV • July 2, 2025