द लैंसेट अध्ययन: 2050 तक कैंसर से मौतों में 75% तक वृद्धि का अनुमान
द लैंसेट में प्रकाशित नवीनतम अध्ययन के अनुसार, 2050 तक वैश्विक स्तर पर कैंसर से होने वाली मौतों में लगभग 75% की वृद्धि हो सकती है, जिससे सालाना 18.6 मिलियन मौतों का अनुमान है। यह वृद्धि मुख्यतः जीवनशैली से संबंधित कारकों जैसे अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू और शराब का सेवन, और पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण हो सकती है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि 2023 में कैंसर से 10.4 मिलियन मौतें हुईं, जो 1990 के मुकाबले 74% अधिक हैं।
भारत में कैंसर की स्थिति:
भारत में भी कैंसर के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। 1990 में प्रति 100,000 लोगों में 84.8 कैंसर के मामले थे, जो 2023 में बढ़कर 107.2 हो गए, यानी 26.4% की वृद्धि। कैंसर से होने वाली मौतों की दर भी 1990 में 71.7 प्रति 100,000 से बढ़कर 2023 में 86.9 हो गई। यह वृद्धि मुख्यतः जीवनशैली से संबंधित कारकों, जैसे अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू और शराब का सेवन, और प्रदूषण के कारण हो सकती है।
निवारण के उपाय:
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि कैंसर से होने वाली मौतों में से 42% उन कारकों के कारण होती हैं जिन्हें नियंत्रित किया जा सकता है, जैसे तंबाकू का सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार, उच्च रक्त शर्करा, और प्रदूषण। इसलिए, सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में इन कारकों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन कारकों को नियंत्रित किया जाए, तो कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या में महत्वपूर्ण कमी लाई जा सकती है।
निष्कर्ष:
कैंसर से होने वाली मौतों में वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय है, विशेषकर निम्न और मध्य आय वाले देशों में। भारत में भी यह वृद्धि चिंताजनक है, और इसके निवारण के लिए जीवनशैली में सुधार, नियमित जांच, और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में बदलाव की आवश्यकता है। सभी को इस दिशा में जागरूक और सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है।